Friday, August 19, 2011

self respect

अल्फ़ाज़ों मैं वो दम कहाँ जो बया करे शख़्सियत हमारी,
 रूबरू होना है तो आगोश मैं आना होगा , 
यूँ देखने भर से नशा नहीं होता जान लो साकी, 
हम इक ज़ाम हैं हमें होंठो से लगाना होगा ......
 हमारी आह से पानी मे भी अंगारे दहक जाते हैं ;
 हमसे मिलकर मुर्दों के भी दिल धड़क जाते हैं ..
 गुस्ताख़ी मत करना हमसे दिल लगाने की साकी ;
 हमारी नज़रों से टकराकर मय के प्याले चटक जाते हैं..

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